जिंदगी के आखरी 7 मिनट आपके साथ बिताऊं

जय जोहार 
सात फेरों...
सात वचनों...
और
सात जन्मों तक के जीवन के इस पड़ाव में मैं तुम्हारे साथ अपने जीवन के आखिरी सात मिनट को संजोना चाहता हूँ।

मैंने सुना है कि आखिरी के उन सात मिनट में मनुष्य उन सारे सुनहरे पलों को जीता है,देखता है जो उसने अपने सम्पूर्ण जीवन में जिए हैं..

सुनों फलानी..❣️

लोकलाज...
समाज...
और
दुनियां क्या कहती है तुम उसे जरा भी नही सुनना?
सुनना भी तो बस मेरी बातों को। एकबार फिर तुम उसी लाल जोड़े में सिंदूर लगाए ,महावर मुन्जित पैरों से मद्धम-मद्धम मेरी ओर आना और मेहंदी भरे हाथों से मेरे सिर को अपनी गोद में रखकर। मेरे कपोलों को सहलाना जिससे आखिरी क्षण की पीड़ाएँ बिल्कुल कम हो जाएँ एकदम शून्य..

सुनों फलानी..❣️

रोना बिल्कुल भी नही क्योंकि तुम्हारे आँखों से गिरा आँसुओं का एक-एक कतरा मेरे मोक्ष के राह का कंटक होगा।

और तुम वैसे भी अन्नपूर्णा की साक्षात अवतार हो,जिसका कार्य ही सम्पूर्ण सृष्टि पर मुस्कान बिखेरना है..!!

बुझी की नही
फलानी..❣️

बोलो
बोलो न..!

# राकेश देवडे बिरसावादी 🌱 

❣️❣️

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