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महुआ

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"महुआ के पेड़ और प्राचीन आदिवासी समाज का बहुत गहरा नाता है। जब अनाज नहीं था तब आदिम आदिवासी समाज के लोग महुआ के फल को खाकर अपना जीवन गुजारते थे, आदिवासी समाज के पारंपरिक सांस्कृतिक लोकगीतों में महुआ के गीत गाए जाते हैं। विशेष प्राकृतिक अवसरों पर आज भी महुआ के पेड़ की पूजा की जाती है। जंसिता केरकेट्टा की एक सुंदर कविता!   क्यों महुआ तोड़े नही जाते पेड़ से  •••••••••••••••••••••••••••••••• माँ तुम सारी रात  क्यों महुए के गिरने का इंतज़ार करती हो ? क्यों नही पेड़ से ही सारा महुआ तोड़ लेती हो ? माँ कहती है वे रात भर गर्भ में रहते है  जन्म का हो जाता है समय पूरा  खुद ब खुद धरती पर आ गिरते है।। इतनी बात ने दिल दिमाग़ में बहुत जगह बना दी।। " ✍️सामाजिक कार्यकर्ता राकेश देवडे़ बिरसावादी जयस बिरसा ब्रिगेड  महुआ (वानस्पतिक नाम : Madhuca longifolia/mahua लोंगफोलिआ) महुआ के फूलों से  देशी शराब बनायी जाती है। रसायन (केमिकल) से मुक्त महुआ की मोंद (शराब) का उपयोग आदिवासी पुरखो/खत्रीज को चढा़ने तथा प्राकृतिक पूजा अ...

भारतीय खो-खो टीम में शामिल क्षेत्र के खिलाड़ी सचिन भार्गव ने चौथे एशियन खो-खो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर मध्यप्रदेश का नाम किया रोशन

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 दुनिया में बनाई पहचान, समाजजनों ने रैली निकालकर किया जोरदार स्वागत।                देवास: ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है पर्याप्त अवसर मिलने पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते है ग्रामीण बच्चे। असम में संपन्न हुई चौथी एशियाई खो खो चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने फाइनल में नेपाल को 6 अंकों और एक पारी से हराकर गोल्ड मेडल खिताब जीता। भारतीय खो-खो टीम में देवास जिले से 110 किमी दूर उदयनगर तहसील अंतर्गत आदिवासी बहुल जंगलों में स्थित ग्राम कटुक्या के सचिन भार्गव भी शामिल थे। पुरे विश्व में खो- खो खेल में स्काई डाइन मारने वाले सचिन पहले खिलाड़ी हैं।गोल्ड मेडल जीतकर वापस अपने गांव पहुंचे सचिन का क्षेत्रवासियों ने जोरदार स्वागत किया।रैली उदयनगर चौक से बिरसा मुंडा फाटा होकर सचिन के गांव कटुक्या पहुंची जहां पर समस्त ग्रामवासियों तथा आदिवासी समाजजनों ने जोरदार स्वागत किया। सचिन की यह उपलब्धी क्षेत्र के बच्चों के लिए प्रेरणादायक है। सचिन भार्गव ने कहा - देश की लिए खेलकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है...

वैज्ञानिक अधिकारी' बनकर गांव के बेटे ने किया क्षेत्र का नाम रोशन ,परिवार तथा समाजजनों ने हर्ष जताया

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 "आज नहीं तो कल होगा हर मुश्किल का हल होगा विश्वास अगर हो अपने श्रम पर तो मरुस्थल में भी जल होगा।" इस कथन को सच साबित कर दिखाया है  आदिवासी समाज के डॉ. मोहन सिंह पिता कुंवर सिंह डावर ने ।डही तहसील के ग्राम रेबड़दा के मोहन ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 'वैज्ञानिक अधिकारी' की परीक्षा में सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। वही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आदिवासी समाज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने। मोहन की प्रारंभिक पढ़ाई रेबड़दा में हुई है। 12 वी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुक्षी जिला धार से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के पश्चात शिक्षा के सफर को आगे बढ़ाते हुए शासकीय आदर्श (स्वशासी) होलकर विज्ञान महाविद्यालय टंट्या भील चौरहा ए.बी. रोड़ इंदौर से बीएससी तथा रसायन शास्त्र में एमएससी किया।रसायन शास्त्र से पी.एच.डी. भी पूर्ण की।इस उपलब्धि से पूरे परिवार समाज दोस्त व शिक्षकों में हर्ष है।                     सफलता का श्रेय वह अपने  माता-पिता के साथ साथ उनके गुरु डॉक्टर अशोक कुमार बघेल जि...

महू हत्याकांड के आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई करके फांसी दी जाए: जयस बिरसा ब्रिगेड देवास

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प्रेस विज्ञप्ति  ✍️                    महू हत्याकांड के आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई करके फांसी दी जाए- जयस बिरसा ब्रिगेड  महू के जघन्य हत्याकांड को लेकर जयस बिरसा ब्रिगेड देवास ने राष्ट्रपति के नाम डिप्टी कलेक्टर शिवानी तरेटिया को सौंपा ज्ञापन।                                             देवास: जयस बिरसा ब्रिगेड के जिला प्रभारी अनिल बरला ने बताया कि आदिवासी समाज पर लगातार शोषण और अत्याचार बढ़ रहा है जो चिंताजनक है। विगत दिनों महू थाना डोंगरगांव चौकी जिला इंदौर मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय की युवती को शादी का झांसा देकर कई दिनो तक यौन शोषण व प्रताड़ित करने के बाद परिवार संग मिलकर उसकी हत्या कर दी गई। पीड़ित परिवार एफआईआर करने जब थाने पहुंचा तो उनकी एफआईआर दर्ज नहीं करके उन्हें भगा दिया गया, फिर मृत लड़की का शव लेकर थाने के सामने धरना दिया तब पुलिस द्वारा हवा फायरिंग के नाम पर राह...