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टंट्या भील बलिदान दिवस 04 दिसंबर

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इंडियन राबिनहुड महायोद्धा टंट्या भील बलिदान दिवस 04 दिसंबर :  भारतीय इतिहास में एक से बढ़कर एक योद्धा हुए हैं। देश की ख़ातिर इन क्रांतिकारियों ने अपने प्राण तक न्योछावर कर दिये। 1857 की क्रांति से पहले से लेकर देश आज़ादी तक, कई क्रांतिकारियों ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ अपने अपने तरीके से जंग लड़ी थी। अंग्रेज़ों से जंग लड़ने वाले एक क्रांतिकारी 'टंट्या भील' भी थे। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की पंधाना तहसील के बडौदा गांव में 26 जनवरी 1842 में टंट्या भील का जन्म हुआ था। इनके पिता भाऊ सिंह भील ने टंट्या को लाठी-गोफन व तीर-कमान चलाने का प्रशिक्षण दिया। टंट्या ने धर्नुविद्या में दक्षता हासिल कर ली, लाठी चलाने और गोफन कला में भी महारत प्राप्त कर ली। आदिवासियों के लिए देवता हैं टंट्या मामा टंट्या का वास्तविक नाम तांतिया भील था जिसे अंग्रेज़ों ने टंट्या कर दिया था टंट्या भील का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है और आज भी मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र के राज्य में बहुत से आदिवासी घरों में टंट्या भील की पूजा की जाती है क्योंकि टंट्या भील को आदिवासियों ने देवता की तरह मान...