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जून, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर कुछ सवाल

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वीरांगना रानी दुर्गावती शहादत दिवस....(24जून)...... " वीरांगना रानी दुर्गावती का जो इतिहास हमें परोसा गया है, कितने सामाजिक लोग उससे सहमत है?" मेरा आप लोगों से कुछ सवाल है? १. वीरांगना मार के मरती है या खुद को मार लेती हैं? २. क्या कोई मां अपने बच्चे का मर्डर कर सकती हैं? ३. 7500 सैनिकों के साथ लड़ रही रानी दुर्गावती आत्महत्या कर सकती हैं क्या? ४. रानी दुर्गावती की मृत्यु के बाद गोंडवाना लैंड की १.२७ हजार हेक्टेयर जल जंगल जमीन पर किसने कब्जा जमाया?https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid02bBEC8Te8JLDbFQrzvrW8nf1X9jzVdX2gSEkPRDvDbn8xKnKycdJv7rctzHdmiByQl&id=100003323568717&sfnsn=wiwspmo&mibextid=RUbZ1f ५. रानी दुर्गावती के शासन काल के समय 12 राज्यों में मुगलों के साथ संयुक्त शासन चल रहा था फिर क्या वजह हुई जो रानी दुर्गावती को मुगलों के खिलाफ लड़ना पड़ा? १३. क्या किसी गैर आदिवासी समाज में आदिवासी लड़की को अपना राज पाट सौंपा हो उसका नाम बताएं? उक्त पांच प्रश्न का जवाब जो देगा वही असली समाजसेवी होगा?? चुनौती है आपके लिए?    : राकेश ...

भाईचारा सौहार्द व एकता की मिसाल पेश करती भीमसी की 100 साल पुरानी परंपरा

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" भाईचारा, सौहार्द व एकता की मिसाल पेश करती हमारे गांव की 100 साल पुरानी कबीलाई परंपरा" जय जोहार सगाजनों, हमारे गृह गांव भीमसी तहसील देवास जिला देवास में आज से लगभग 100 साल पुरानी पुरखों तथा बुजुर्गो द्वारा चलाई जा रही परंपरा को वर्तमान पीढ़ी ने संजोकर रखा है, और आज भी उसका निर्वहन कर रहे हैं। बोवनी से पूर्व अच्छी बारिश की कामना व अच्छी फसल पकने तथा पूरे वर्ष भर गांव में कोई बीमारी ना आए, कोई अशुभ काम ना हो, सभी सुखी रहे, सभी की एकता कायम रहे, आपस में भाईचारा व सौहार्द बना रहे, इसी की प्राकृतिक कामना के लिए गांव में स्थित गांव की देवी "मरीमाता" को बकरे की बलि दी जाती है।यही परंपरा का निर्वहन आज भी किया गया। तत्पश्चात प्रसाद स्वरूप कबीलाई व्यवस्था अनुसार घरों के अनुसार हिस्से करके सभी को प्रसादी बांटी गई। पुराने डहालो द्वारा बताया गया यह परंपरा जीवन पर्यंत चलती रहेगी। मुझे मेरे गांव की इस परंपरा पर गर्व है।" ✍️अनिल बरला,जयस नगर अध्यक्ष, जयस बिरसा ब्रिगेड देवास

क्या आने वाली पीढ़ियां वास्तविक आदिवासी संस्कृति को भूल जाएगी??

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"मेरी संस्कृति मेरा अभिमान" ••••••••••••••••••••••••••••• जय बिरसा🌱🌱🌱🌱🌱🌱 जोहार🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 " सगाजनों,वह दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ियां वास्तविक आदिवासी संस्कृति को भूल जाएगी??"   : राकेश देवडे़ बिरसावादी  " संस्कृति,बोली,भाषा, परंपरा, रीति रिवाज, रहन सहन, पहनावा, सामूहिकता, वाद्य यंत्र, कृषि के साधन,घट्टी,तवला,मोटा अनाज ( ज्वार बाजरा, मक्का) पेड़, पौधे, प्रकृति," ।पता नहीं क्यों संस्कृति से लेकर प्रकृति तक उक्त सभी बातों को आदिवासी समुदाय भूलने लगा है जिसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, यदि नहीं तो भविष्य में भुगतने को तैयार रहें।ऐसा क्यों कहां मैंने? विचार कीजिए? आदिवासी समुदाय में पहले महिलाएं नॉटी पहनती थी जिसमें काछडे़ से कमर को कसकर बांध लेती थी,कमर कड़क रहती थी, जब वह गर्भधारण करती थी तो गर्भ में पल रहा बच्चा इधर-उधर नहीं खसकता था, 9 महीने के बाद जब गर्भ काल की समय अवधि पूर्ण हो जाती थी तब आसानी से प्राकृतिक डिलीवरी हो जाया करती थी, आदिवासी गुगल हमारे बापदादा के मुंह से सुना था कहीं आंगन में ,चूल्हे के पास, खेत में  खलियान में, क...

जयस बिरसा ब्रिगेड देवास ने स्वतंत्रता सेनानी शहीद बिरसा मुंडा को दी जोहारमय श्रद्धांजलि

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"कई सदियों तक हमारे दिल दिमाग में जिंदा रहेंगे धरती आबा: अनिता अलावा जयस नारी शक्ति देवास"  🌱 _________________________________ 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 जय बिरसा........ "बिरसा मुंडा शहादत दिवस 9 जून 2023" जयस बिरसा ब्रिगेड युवाओं ने स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के 123 वे शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की.... देवास। आज संपूर्ण राष्ट्र के लिए मात्र 25 वर्ष की आयु में शहीद होने वाले स्वतंत्रता सेनानी धरती आबा बिरसा मुंडा को मीठा तालाब स्थित पार्क में जयस बिरसा ब्रिगेड युवाओं द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शहीद भगवान बिरसा मुंडा जिन्होंने अल्पायु में बंदूकधारी गोरी चमड़ी वाले ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तीर कमान और गोफन से लड़ाई लडी़। घमंडी अत्याचारी अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे। अल्पायु में राष्ट्र के लिए शहीद होने वाले बिरसा मुंडा के 123 वे शहादत दिवस पर जयस बिरसा ब्रिगेड युवाओं ने मीठा तालाब स्थित पार्क में श्रद्धांजलि अर्पित की। सामाजिक कार्यकर्ता जयस नारी शक्ति अनिता अलावा ने बताया कि बिरसा मुंडा का जन्म झारखंड ...

गिद्ध और छोटी लड़की : राकेश देवडे़ बिरसावादी

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जय बिरसा जय जोहार  गिद्ध और छोटी लड़की (The vulture and the little girl" ) यह तस्वीर तो याद होगा आप सबको इसे नाम दिया गया था " The vulture and the little girl" इस तस्वीर में एक गिद्ध भूख से मर रही एक छोटी लड़की के मरने का इंतज़ार कर रहा था इसे एक साउथ अफ्रीकन फोटो जर्नलिस्ट केविन कार्टर ने 1993 में सूडान के अकाल के समय खींचा था और इसके लिए उन्हें पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था लेकिन कार्टर इस सम्मान का आनंद कुछ ही दिन उठा पाए क्योंकि कुछ महीनों बाद 33 वर्ष की आयु में उन्होंने अवसाद से आत्महत्या कर लिया था। क्या हुआ? दरअसल जब वे इस सम्मान का जश्न मना रहे थे तो सारी दुनिया में प्रमुख चैनल और नेटवर्क पर इसकी चर्चा हो रही थी... उनका अवसाद तब शुरू हुआ जब एक 'फोन इंटरव्यू' के दौरान किसी ने पूछा कि उस लड़की का क्या हुआ? कार्टर ने कहा कि वह देखने के लिए रुके नहीं क्योंकि उन्हें फ्लाइट पकड़नी थी इस पर उस व्यक्ति ने कहा, " मैं आपको बता रहा हूँ कि उस दिन वहां दो गिद्ध थे जिसमें एक के हाथ में कैमरा था" इस कथन के भाव ने कार्टर को इतना विचलित क...

देव मोगरा बीज धान्य माई माटी मावड़ी दर्शन : अनिल सस्त्या बड़वानी

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आदिवासी विश्लेषक लेखक शोधार्थी अनिल सस्त्या बड़वानी का जबरदस्त लेख:  देव मोगरा बीज धान्य माई माटी मावड़ी दर्शन  °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°=====°°°°°°°°°°°°°°°° {नर्मदा,तापी,सातपुडा,भूरा डोंगर, रेवया रेत,मेजरीमाता, कुंदुराना बावजंगजा, तोरणमाव, देव मोगरा डोंगरी पहाड़, अरावली पर्वत डोंगरी श्रंखला, आदिवासी शक्ति रूपी पुरखों की जीवंत महत्ता पर विश्लेषण } शोध,खोज,विश्लेषण,संश्लेषण,पुरखों की अलिखित आध्यात्मिक शक्ति महत्व समझ मान्यताओं पर कणी,कण कंसरी,धान्य,बीज समृद्धि,किसान कबिलाई गण प्रमुख आदिवासी समाज की कुलदेवी माई माटी,मावड़ी,आई, पूरब में विंध्याचल डोंगरी पहाड़,  नर मादा नर्मदा माई माटी (नेवली कुवर,रेवा,रेवटी कुवर) पूर्व से पश्चिम तक सतपुडा डोंगर के उत्तरी भूभागीय पूर्व से पश्चिम में बहती जीवनधारा नर्मदा (रेवलि कुवर) माई माटी मावड़ी, नर्मदा और सातपुडा पहाड़ी के दक्षिणी भाग में पूर्व से पश्चिम में तापी नदी शाखाओं के रूप में कई सहायक जीवन दाय नदियों का जुड़ना,आदिवासी समाज की प्रकृति एवम प्राकृतिक पारिस्थितिक जैव विविधता संरक्षण पूजन का महंत की विरासत, धरोहर से जुड़ा हुआ ...

भारत को हिंदुस्तान और यहां के लोगों को हिंदू क्यों कहां जाता है?

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भारत को हिंदुस्तान और यहां के लोगों को हिंदू क्यों कहां जाता है? ईरान के महान सम्राट डेरियस प्रथम ने 516-515 BC अर्थात 516+2023=2539 साल पहले गांधार, सिंधुघाटी, हेलमंड (हरहवती - सरस्वती) नदीघाटी इलाका विजित किया!!यहीं पहला आर्यन आक्रमण था। 490 BC अर्थात 490+2023=2513 साल पहले लिखित ईरान के नक्श - ए- रूस्तम ( DNA या DTH) शिलालेख में पहली बार सिंधुघाटी के लिए "हिदुश" शब्द इस्तेमाल किया हैं, इसलिए भारत को हिंदुस्तान और यहां के लोगों को हिंदू कहते हैं, यह इतिहास हैं। ✍️ राकेश देवडे़ बिरसावादी  (सामाजिक कार्यकर्ता) जयस बिरसा ब्रिगेड देवास