संदेश

नवंबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नील नदी की बाढ़ को शांत करने जवान लड़कियों की बली चढ़ाना अंधविश्वास ही है।

चित्र
    जय जोहार....जय बिरसा  ◆ मिस्र में विज्ञान और अंधविश्वास साथ साथ चलता था. दिमाग का एक हिस्सा ठीक काम कर रहा था। ◆ लाश को लंबे समय तक रखने के लिए दवाओं और पिरामिड का आविष्कार हो रहा था. दिमाग के दूसरे हिस्से में अंधविश्वास भरा हुआ। ◆ जब नील नदी में बाढ़ आती तो लोग कहते नील का देवता नाराज है. लेकिन ऊंचे गगनचुंबी पिरामिड बनाने वालों को इतनी भी जानकारी नही थी। ◆ बाढ़ आने पर नील नदी के देवता को शांत करने के लिए कुंवारी कन्याओं की बली दी जा रही थी. ज़िंदा उन्हें उफ़नती नदी में फेंक दिया जाता था। ◆ बाढ़ आती है तो कुछ दिनों बाद बाढ़ का पानी कम भी हो जाता है. बली देने के बाद कहते अब जाकर नील नदी का देवता शांत हुआ है। आप सभी वैज्ञानिक तथा तर्कशील वैचारिक लोग चिंतन मंथन अवश्य करें। : राकेश देवडे़ बिरसावादी 

जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं: राकेश देवडे़ बिरसावादी

चित्र
"आदिवासी समाज को जल जंगल जमीन से विस्थापित करने का अर्थ आदिवासी संस्कृति, सभ्यता, रीति रिवाज, परंपरा का विनाश करना है:" राकेश देवडे़ बिरसावादी  देवास। आज ग्राम कूपगांव के ग्रामीणों द्वारा बागली एसडीएम को आवेदन सौंपा गया। आवेदन में बताया गया कि आदिवासी भारत भूमि का इंडिजिनियस एबोरिजन आदिवासी गणसमूह है जो अरावली विंध्याचल सतपुड़ा सह्याद्री पर्वतमाला और चंबल बनास लूनी साबरमती माही नर्मदा ताप्ती गोदावरी नदियों की उत्पत्ति काल से भारत की मूल मिट्टी पानी आबोहवा  में जन्मा उपजा मूलबीज मूल वंश है तथा प्राकृतिक कुदरती नियमों से संचालित होता है। आदिवासी समुदाय की अपनी रूढ़ि व परंपरा है जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 (3) क में संविधान निर्माताओं द्वारा रखा गया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदिवासी समुदाय पर किए गए शोषण अत्याचार तथा जीवन-शैली को सुधारने हेतु गंभीरता दिखाई गई है,किंतु बड़े दुःख के साथ अवगत करवाया जाता है कि आदिवासी क्षेत्र ग्राम कूपगांव तहसील बागली जिला देवास में आदिवासी समाज के लोगों को उजाड़ने हेतु  ...