जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं: राकेश देवडे़ बिरसावादी
"आदिवासी समाज को जल जंगल जमीन से विस्थापित करने का अर्थ आदिवासी संस्कृति, सभ्यता, रीति रिवाज, परंपरा का विनाश करना है:" राकेश देवडे़ बिरसावादी
देवास। आज ग्राम कूपगांव के ग्रामीणों द्वारा बागली एसडीएम को आवेदन सौंपा गया। आवेदन में बताया गया कि आदिवासी भारत भूमि का इंडिजिनियस एबोरिजन आदिवासी गणसमूह है जो अरावली विंध्याचल सतपुड़ा सह्याद्री पर्वतमाला और चंबल बनास लूनी साबरमती माही नर्मदा ताप्ती गोदावरी नदियों की उत्पत्ति काल से भारत की मूल मिट्टी पानी आबोहवा में जन्मा उपजा मूलबीज मूल वंश है तथा प्राकृतिक कुदरती नियमों से संचालित होता है। आदिवासी समुदाय की अपनी रूढ़ि व परंपरा है जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 (3) क में संविधान निर्माताओं द्वारा रखा गया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदिवासी समुदाय पर किए गए शोषण अत्याचार तथा जीवन-शैली को सुधारने हेतु गंभीरता दिखाई गई है,किंतु बड़े दुःख के साथ अवगत करवाया जाता है कि आदिवासी क्षेत्र ग्राम कूपगांव तहसील बागली जिला देवास में आदिवासी समाज के लोगों को उजाड़ने हेतु माइक्रो सिंचाई परियोजना प्रस्तावित है जिसमें हमारे गांव के पास स्थित कूप तालाब का विस्तार कर गहरीकरण किया जा रहा है जिससे बरसों से गांव में निवासरत ग्रामवासी विस्थापित हो जायेंगे। आदिवासी समाज को जल जंगल जमीन से विस्थापित करने का अर्थ आदिवासी संस्कृति, सभ्यता, रीति रिवाज, परंपरा का विनाश करना है। हमारी समस्या पर गंभीरता तथा सहानुभूति पूर्वक विचार विमर्श करके उक्त योजना को तत्काल रद्द किया जाए । विदित है कि मतदान के दिन ग्राम कूपगांव के ग्रामीणों द्वारा मतदान करने से बहिष्कार किया गया था जिस पर एसडीएम द्वारा समझाईश के बाद मतदान शुरू हुआ था।
भवदीय
राकेश देवडे़
9617638602
सादर प्रकाशनार्थ प्रेषित
दिनांक 21 नवंबर 2023
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