गिद्ध और छोटी लड़की : राकेश देवडे़ बिरसावादी
जय बिरसा जय जोहार
यह तस्वीर तो याद होगा आप सबको इसे नाम दिया गया था "The vulture and the little girl" इस तस्वीर में एक गिद्ध भूख से मर रही एक छोटी लड़की के मरने का इंतज़ार कर रहा था इसे एक साउथ अफ्रीकन फोटो जर्नलिस्ट केविन कार्टर ने 1993 में सूडान के अकाल के समय खींचा था और इसके लिए उन्हें पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था लेकिन कार्टर इस सम्मान का आनंद कुछ ही दिन उठा पाए क्योंकि कुछ महीनों बाद 33 वर्ष की आयु में उन्होंने अवसाद से आत्महत्या कर लिया था। क्या हुआ? दरअसल जब वे इस सम्मान का जश्न मना रहे थे तो सारी दुनिया में प्रमुख चैनल और नेटवर्क पर इसकी चर्चा हो रही थी...उनका अवसाद तब शुरू हुआ जब एक 'फोन इंटरव्यू' के दौरान किसी ने पूछा कि उस लड़की का क्या हुआ? कार्टर ने कहा कि वह देखने के लिए रुके नहीं क्योंकि उन्हें फ्लाइट पकड़नी थी इस पर उस व्यक्ति ने कहा, "मैं आपको बता रहा हूँ कि उस दिन वहां दो गिद्ध थे जिसमें एक के हाथ में कैमरा था"
इस कथन के भाव ने कार्टर को इतना विचलित कर दिया कि वे अवसाद में चले गये और अंत में आत्महत्या कर ली। कार्टर आज जीवित होते अगर वे उस बच्ची को उठा कर यूनाईटेड नेशन्स के कुपोषण सेन्टर तक पहुँचा देते जहाँ पहुँचने पर उसे जीवन दान मिल जाता। अतः किसी भी प्रोफेशन में आप कुछ भी पोज़िशन प्राप्त कर लें लेकिन आप मे मानवता नही तो सब कुछ व्यर्थ है आप में मानव है तो मानव होने का परिचय दें।
चूँकि मैं ये सच्ची घटना कई बार पढ़ चुका हूँ और सोचने पर मज़बूर हो जाता हूँ कि क्या हुआ होगा उस दिन, फिर उसके बाद ये सोचता हूँ अब जो हुआ वो बदला नहीं जा सकता है लेकिन ख़ुद में बदलाव करके तमाम जगह पर अपने इंसानियत को दिखाया जा सकता है। अन्न का अपमान न करें और अगर सम्भव है किसी इंसान की मदद कर सकते हैं तो ज़रूर करना चाहिए... न कि मुँह मोड़ लें।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 की रिपोर्ट में
121 देशों की रैंकिंग को लेकर जारी इस रिपोर्ट में भारत 107वें पायदान पर है। जीएचआई के कुल स्कोर में भारत की स्थिति और ख़राब हुई है। साल 2014 में जहाँ ये स्कोर 28.2 था वहीं 2022 में यह 29.1 हो गया है जो कि बेहद गंभीर श्रेणी में आता है।
आजकल शादी और पार्टियों में किसानों के पसीने से उगाए गए अनाज का अपमान होता है, शहर के विकसित लोग बहुत सारा खाना डस्टबिन में डाल देते हैं।किसी ने क्या खूब कहा है "उतना ही लो थाली में व्यर्थ ना जाए नाली में।"
✍️राकेश देवडे़ बिरसावादी
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