देव मोगरा बीज धान्य माई माटी मावड़ी दर्शन : अनिल सस्त्या बड़वानी
आदिवासी विश्लेषक लेखक शोधार्थी अनिल सस्त्या बड़वानी का जबरदस्त लेख:
देव मोगरा बीज धान्य माई माटी मावड़ी दर्शन
{नर्मदा,तापी,सातपुडा,भूरा डोंगर, रेवया रेत,मेजरीमाता, कुंदुराना बावजंगजा, तोरणमाव, देव मोगरा डोंगरी पहाड़, अरावली पर्वत डोंगरी श्रंखला, आदिवासी शक्ति रूपी पुरखों की जीवंत महत्ता पर विश्लेषण }
शोध,खोज,विश्लेषण,संश्लेषण,पुरखों की अलिखित आध्यात्मिक शक्ति महत्व समझ मान्यताओं पर कणी,कण कंसरी,धान्य,बीज समृद्धि,किसान कबिलाई गण प्रमुख आदिवासी समाज की कुलदेवी माई माटी,मावड़ी,आई,
पूरब में विंध्याचल डोंगरी पहाड़,
नर मादा नर्मदा माई माटी (नेवली कुवर,रेवा,रेवटी कुवर) पूर्व से पश्चिम तक सतपुडा डोंगर के उत्तरी भूभागीय पूर्व से पश्चिम में बहती जीवनधारा नर्मदा (रेवलि कुवर) माई माटी मावड़ी, नर्मदा और सातपुडा पहाड़ी के दक्षिणी भाग में पूर्व से पश्चिम में तापी नदी शाखाओं के रूप में कई सहायक जीवन दाय नदियों का जुड़ना,आदिवासी समाज की प्रकृति एवम प्राकृतिक पारिस्थितिक जैव विविधता संरक्षण पूजन का महंत की विरासत, धरोहर से जुड़ा हुआ पुरखों की समकालीन अध्यात्मिक दर्शन पूजन का संचलन व्यवस्था है,
#सातपुड़ा(सात पाहड़ी,सात डोंगरिया,डोंगर देव)
मेजरी माता डोंगरी पहाड़,कुंबाई कुंदुराना, झुंजीराना
(बावन गजा,अड़िया अतिक्रमित ग्रस्त डोंगर)रानीकाजल माई माटी,महाराष्ट्र सीमा क्षेत्र स्थित डोंगर देव
#तोरण_माल(माव, मावी,माव्या)
*तोरण* (सतपुडा पर्वत श्रृंखला,शिखर,लाइन,पहाड़ी,छीग, प्रकृति निर्मित अदभुत कलाकृति सिंगार ढलान डोंगर तार,श्रंखला),
*माल* या माव (पहाड़ी क्षेत्र,ढलानीय क्षेत्र,डोंगर देव,बयडी,खयड़ी क्षेत्र) जिसे एक धागे में पिरो जैसा क्षेतिज,नुकुला,तीक्ष सतपुडा डोंगर पहाड़ क्षेत्र कहा जाता है,
आदिवासी आध्यात्मिक डोंगर देव दार्शनिक क्षेत्र जहां राजा पांठा,गांडा ठाकुर(वीना ठाकुर देव) माई मावडी माटी,रानीकाजल माई,रासायनिक विधि ज्ञान प्रकृति पदत्त अकाल कालीन, परिस्थिति में जीवन रक्षक विधि देसी महुआ,शराब,
(आड़िया भाषा में सोम रस) दारू बनाने की विधिक ज्ञान दारू बनाने की जानकारी,जिसमे 97% शुद्ध एल्कोहल होता है,
महुआ शराब का वाष्पीकरण,भाप निर्माण विधि द्वारा शुद्ध जलीय कस का निर्माण जिसमे कई रोक प्रतिरोधक निदान,भूख,थकान,दर्द बीमारी निदान,भुखमरी,अकाल की स्थिति में महुआ वृक्ष से जीवन बचाव का प्रयाय खोज पूर्वज कालीन दर्शन ज्ञान, आदि का आध्यात्मिक शक्ति महत्व तोरणमाल आदिवासी डोंगरिया वासी,आदिवासी क्रान्तिकारी गोरख्या नायक (नयरा,नाइक,नाहार,(शेर सी शक्ति आध्यात्मिक रूप परिवर्तन ज्ञान निपुर्ण गोरख्या नायक,नायकड़ा,नाहार,से भिड़ने वाले, लडने वाले,हराने वाले,शेर जेसे पुर्तीले जानकार डोंगर पहाड़ (आडियो द्वारा संक्रमित अतिक्रमित गोखरनाथ नाम) है,
#डोंगर_भिलेडी(पावागढ़ डोंगर पहाड़ वसी काली माई माटी आदिवासी आध्यात्मिक दर्शन क्षेत्र है,
आदिवासी बढ़वा विद्या ज्ञान आदिवासी जीवन मंत्र जाप संकलित #वीरबारी (महाराष्ट्र,गुजरात,मध्यप्रदेश बॉर्डर क्षेत्र पर स्थित आदिवासी आध्यात्मिक दर्शन जात बाटने,अलग अलग क्षेत्र में विस्तार होने का क्षेत्र)आदिवासी आध्यात्मिक दर्शन क्षेत्र,इंदिराजा, ढेज्या,डूमन्या (आदिवासी मोंख्या)ज्ञान दर्शन वीरबारी स्थल है,
#तोरनमाल(माव) से फिर पश्चिम की ओर जाते हुए सातपुडा डोंगर पहाड़ क्षेत्र में देव मोगरा दर्शन क्षेत्र #राजा_पांथा, #गांड़ा_ठाकुर(वीना ठाकुर) दाबी राजा, #सागबारा क्षेत्र स्थिति सतपुडा डोंगर पश्चिम क्षेत्र में विस्तार गमन आदिवासी कुलदेवी माई माटी मावड़ी,की विरासत धरोहर मौखिक संचलन में आज भी वर्तमान आदिवासी पीढी अपनी लोकगीतों, सामुहिक गीतों,कथाओं, आध्यात्मिक जप में संचलित है...
#अकाल,के समय में *भूरा डोंगर*
(हिमालय पर्वत भूरा डोंगर देव दार्शनिक क्षेत्र)से होते हुए मोहन जोदड़ो
(भूरीयो डोंगर लीलो वासे रे मोहन रे आला)आदिवासी लोग गीत नवाई सामूहिक गीत जिसमे आदिवासी आध्यात्मिक शक्ति मोखिक दर्शन देव मोंखया को न्यौता देकर त्यौहार के लिऐ बुलाया जाना,(गीत का हिंदी सार
(हिमालय पर्वत पास में बसा मोहन जोदड़ो आला(यहां से आना)को लोकगीतों में पीढ़ी दर पीढ़ी मोंखित अध्यात्मिक दर्शन के रूप में प्रयुक्त,से लेकर,
#रेव्या_रेत (रेगिस्थलीय रेतीला भूभाग,से लेकर आदिवासी कुलदेवी ठेलारिया जुड़ी बुल्य (जोड़ी बैल) लेने भेजना,आबा कुंबी,धुंदा कुंबी,
(इनके बच्चे कुंबाई कुंदुरानु),को याहा मोगी ने बेल लेने भेजना,बेल किसी के हाथ न आना या छूट कर भागना उसके बाद,नाक में नाथ डालकर बस में करना,सिखाना,से खेती किसानी गण कबिलाई समाज द्वारा धरती मई
(छाती चीर),हल जोत कर जीवन पर्याय बीज उत्पादन खेती किसानी कार्य शुरू करना, अकाल के समय लोगो का जीवन बचाना,लोगो को बचाने के लिए धन, धान्य, बीजों का संरक्षण,पोषण,रक्षक करना लोगो को देना कण कंसरी,बीज उत्पादन खेती किसानी कार्य का ज्ञान दर्शन आदिवासी कुलदेवी माई माटी मावड़ी से संचलित व्यवस्था है..
#देव_मोगरा माई द्वारा संचालित व्यवस्था ज्ञान दर्शन,आज भी पांच प्रकार से बीज माई दर्शन को जाकर आदिवासी समाज बॉनी के पहले अखतीज माह में आदिवासी समाज के लोग हजारों लाखों की संख्या में दर्शण के लिए पहुंचते है, ओर बीज पांच प्रकार के बीज धान्य माई के दर्शन,तर्पण से घर लेकर आते है,
जो बीजों को बोवनी के बीजों में मिलाकर खेती में बोकर अच्छा उत्पादन होने के साथ ही इन बीजों का संग्रहण,रक्षक में ये बीज मिलाकर रखने पर कभी खराब न होने के वास्तविक मान्यताएं आदिवासी समाज में देव मोगरा(याहा मोगी)आदिवासी कुलदेवी माई के प्रति आस्था को शारीरिक,मानसिक,बौद्धिक शक्ति के रूप में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत रूप में विख्यात प्राप्त करता है, और अपने अध्यात्म आस्था से आदिवासी समाज को जोड़े रखती है,
यही पर #खोवा_पूजन इसका मतलब खेती किसानी उपरांत पकी ज्वार बीज को सफाई के पहले घर के आंगन में खवा पूजन द्वारा पूजा विधान के बाद सफाई किया जाता है,
साथ ही घर की रक्षक शक्ति के रूप में खिली पुजन कार्य विधि विधान विशेषज्ञ की उपस्थिति में घर के दरवाजे पर लकड़ी की खिली,या साफेन(लोहे से बनाई सांप खिली)को पांच प्रकार के बीजो के साथ पूजन करके बाहरी नकारात्मक हवाओ, ऊर्जा से रक्षण हेतु पूजन होता है, साथ ही पांच प्रकार के बीजों को घर के हर सदस्य को किसी विशेष कपड़े में लपेटकर अपने कमर में बांधा जाता है, यह इस बात का प्रतिक है की, ये पांच प्रकार के बीज आपको हर विपत्ति,अकाल की परिस्थितियों में अपने आप को कैसे बचाया जाए, भोजन व्यवस्था कैसी की जाए, आदि का पुरखो द्वारा संचालित व्यवस्था के प्रति जुड़कर पीढ़ी दर इसके जीवन रक्षक व्यवस्था का निर्माण सुरक्षित अनुकूल वातावरण जीवन मंत्र खेती किसानी गण कबीले व्यवस्था बनाई है..
सातपुडा डोंगर पहाड़ में तोरणमल,देव मोगरा पहाड़ी क्षेत्र में आज भी सेकडो प्रकार की जड़ी बूटियां पर्याप्त मात्रा में मौजूद है, जिसमे कई सेकडो प्रकार की बीमारियों का निदान संभव है,जिसका ज्ञाता भी देव मोगरा माई, रानीकाजल,राजा,पाँठा,गांडा ठाकुर (वीना ठाकुर) रहे होना हम इस बात से कह सकते है की देशी महुआ शराब बनाने की विधि ज्ञान से भी समझ सकते है, उस दौर में इन्ही जड़ी बूटियों द्वारा लोगो को बचाने रक्षण संरक्षण में आयाम मिल पाया होंगा,जो आज भी अंदर आत्मा से आदिवासी समाज को अपने पुरखों की अदृश्य शक्ति को खुद से अपने आप उस और जाने को खींचे जाती है, दूसरा यह कि जिस डोंगरी पहाड़ भूभाग में आदिवासी देवस्थल है उस मान से प्रकृति के सबसे नजदीकी जीवन संबंध गण कबीले खेती किसानी आदिवासी समाज प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों उसके महत्व,गुणों,संकेतो, बीमारी निदान आदि का संभव ज्ञान दर्शन आदिवासी समाज की प्राकृतिक भाषा समझ ज्ञान अपने आप में अदभुत महत्ता दिखाता है.
यही से आध्यात्मिक शक्ति महत्व के #संत_गुलाम_बाबा आदिवासी बीज धान्य, जड़ी बूटी,अध्यात्म शक्ति के प्रति निपूर्ण अध्यात्म को देखने को मिलता है,जिसका पुरखो के समकालीन और भविष्य की परिस्थिति का भविष्यवाणी दर्शण आज भी विख्यात है,
जो हमारे अपने आदिवासी पुरखों की जीवन मान्यताओ के प्रति आदिवासी को जोड़े रखता है,,
आस्था,मन्नत,पूरी होने के प्रति एक विशाल जनसमूह को #देव_मोगरा_याहा_मोगी माई आदिवासी अपने कुल वंश #DNA को अपने साथ आस्था के रूप में जोड़े रखती है, वही पर #महुआ_शराब बनाना पैर जलाकर दारू बनाने की मान्यताएं के निशान, सबूत,आज भी वहा मौजूद है, जिस कुंड में दारू बनाते थे #राजा_पांठा_गांडा_ठाकुर (वीना ठाकुर)वो कुंड आज भी वहा मौजूद है, उस कुंड का जल पीने मात्र से महुआ दारू पीने के बाद जो नशा होता है वो मेने खुद से पीकर महसूस किया ,
ओर उस कुंड का जल आदिवासी समाज के लोग आज भी घर लेकर जाते है,ओर कभी भेड़,बकरी,मुर्गे,जीव आदि के बीमार होने पर पिलाने से ठीक होने का अपने आप में जीवन्त महत्व को झलकाता है,
इस लेख का विश्लेषण संश्लेषण और अधिक मजबूत हो सकता है,या होंगा,
लेकिन यह आदिवासी होकर आदिवासी की अपनी अलिखित शारीरिक,मानसिक, बौद्धिक रूप से पुरखों की वास्तविक मान्यताओं के प्रति वर्तमान पीढी को जोड़े रखना,उसपर गर्व करना और आगे भी इसका संचलन क्रियान्वयन पीढ़ीदर बना रहे,ओर विकट परिस्थितियों में वंश गण कबीले का पोषण रक्षण संरक्षण,के लिए इन आयामों पुरखो की संचालित व्यवस्था से हो सकते के उदेश्य से सारभूत तरीके से विस्तार देने पर जोर दिया है,
जय आदिवासी, जय पुरखा, जय डोंगर देव, देव मोगरा, रानीकाजल,नर्मदा,कुंदुराना,रहा पांठा, गांडा ठाकुर,कुलदेव,
#जोहार_माई_माटी_मावड़ी
शिकायत नामा
लेकिन एसी आदिवासी एतिहासिक धरोहर को संजोकर रखना चाहिए पर कोई शासन, प्रशासन इस और कोई कदम उठाने पर कार्य नहीं है, जबकि कोई बीना इतिहास के किसी का मंदिर निर्माण कर दे उसे इतिहास में सच मानकर उसका पूर्ण संरक्षण होता है, यहां आदिवासी की बात है तो वहा पाखंड, अंधविश्वास का हवाला देकर नजरंदाज भी किया जाता है,
जब सबकुछ विपरीत परिस्थितियों में समाज खुद को अपने पुरखों द्वारा संचालित व्यवस्था से सीखकर खुद को जिंदा रखने के आयाम की खोज कर सके इसलिए सामाजिक पुरखा विरासत धरोहर मान्यताओ के प्रति वर्तमान पीढी जुड़ी रहे यही पोषक, रक्षक संरक्षक पर्याय है..
कुलदेवी मावड़ी देव मोगरा दर्शन पर विश्लेषण लेखन कार्य
✍️अनिल सस्तया धर्मपुर्वी जिला बड़वानी म.प्र.
7746992210
संकलन: राकेश देवडे़ बिरसावादी 🌱
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