घर में कितनी शराब रख सकते हैं?

घर में कितनी शराब रख सकते हैं आदिवासी? 
  आबकारी विभाग मध्यप्रदेश द्वारा दिनांक17अगस्त 2000 को समस्त कलेक्टर मध्यप्रदेश को एक पत्र जारी किया गया था जिसका विषय था "आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासियों को व्यक्तिगत उपयोग हेतु मदिरा के निर्माण की छूट के दुरुपयोग बाबद।"
मध्यप्रदेश शासन वाणिज्य कर विभाग की अधिसूचना क्रमांक 248 -21 दिनांक 7 जनवरी 1998 से आदिवासी क्षेत्रों में 
👉आदिवासियों को स्वयं के उपयोग के लिए : 4.5 लीटर।
 👉 परिवार के लिए 15 लीटर
 👉 सामाजिक तथा त्योहारों के समय 45 लीटर

देशी मदिरा के निर्माण तथा अधिपति की छूट दी गई है। केवल आदिवासियों को छूट। आवश्यकता इस बात की है कि आदिवासियों की इस छूट का फायदा गैर आदिवासी ना उठा पाए। इस हेतु विशेष पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण रखा जावे।
यदि इस तरह कोई प्रकरण आता है तो मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 10 अप्रैल 1915 के अंतर्गत तत्काल कार्यवाही करते हुए संबधित के खिलाफ यथोचित कार्यवाही संपादक की जाए।

क्या है मध्य प्रदेश आबकारी नियम 1915:
यह नियम 10 अप्रैल 1915 को अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था इसके अनुसार
१. किसी मादक द्रव्य का विनिर्माण, परिवहन, आयात ,निर्यात संग्रहण करेगा या उसे कब्जे में रखेगा या बेचेगा।
२. भांग की खेती करेगा ।
३. ताड़ी उत्पन्न करने वाले किसी वृक्ष से ताड़ी का व्यावन करेगा या उससे ताड़ी निकालेगा।
४. किसी मध्य निर्माण शाला या शराब की दुकान का संनिर्माण करेगा या उसे चलाएगा।
५. किसी मदिरा को बोतल में भरेगा।
उक्त अपराध के लिए भारतीय संविधान की धारा 34 /2 के तहत विधि विरुद्ध विनिर्माण परिवहन कब्जा विक्रय आदि के लिए शास्ति ₹500 दंड 1 साल की जेल या ₹2000 दंड या 2 साल की जेल। दुख की बात यह है कि अनुसूचित क्षेत्र मैं यह नियम लागू नहीं है फिर भी गैर संवैधानिक रूप से उक्त कानून में 90% आदिवासियों को गिरफ्तार किया जाता है।
   : राकेश देवडे़ बिरसावादी
     (सामाजिक कार्यकर्ता एवं आदिवासी मुद्दों पर लेखन)

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